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मंत्रीजी ने निर्दलीय ही ठोक दी थी ताल,चुनाव शुरू होने से पहले ही हुए बेहाल

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बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले….

ब्यूरो रिपोर्ट

पटना:बिहार की सियासत में एक पूर्व मंत्रीजी के साथ आजकल यही हो रहा है। चुनाव शुरू होने से पहले ही मैदान में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर ताल ठोक दी थी। चुनाव नज़दीक आया टिकट की भागा भागी शुरू हुई तो अपना ठिकाना भी तलाशने निकले। तीर वाले पुराने घर में दरवाज़ा खटखटाया तो विजय चौधरी जी के यहाँ से संवाद तो आया पर मुख्यमंत्री जी का दिल ऐसा की पसीजा ही नही.. बैरंग ही वापस ख़ाली हाथ लौटना पड़ा।फिर किसी ने समझाया कि इस बार लालटेन वाले तेजस्वी भूमिहारों पर मेहरबान होने वाले हैं तो मंत्री जी के मन में लड्डू फूटा और लालटेन की लौ जलाने पटना दौड़ने लगे। सिद्दिकी साहब से लेकर कहाँ-कहाँ तक नहीं जतन किया पर लालटेन की लौ ऐसी की जली ही नहीं।मंत्रीजी फिर हलकान होकर क्षेत्र में निर्दलीय हो गए।मायूसी ज़्यादा बढ़ती इससे पहले किसी ने समझाया की क्षेत्र में लोजपा का समीकरण तो जिताऊ बन गया है।फिर क्या था मंत्री जी एक बार फिर निकल पड़े पटना बंगले की चाभी ढूंढने। इस बार किसी ऐसे पारस की तलाश में थे जो बस छुए और मिट्टी सोना हो जाए पर इस बंगले में पुरानी सेंधमारी के ख़राब रिकॉर्ड के कारण यहाँ भी एंट्री नहीं हो पाई।अब बेचारे मंत्रीजी करें भी तो क्या करें? एक बार फिर से निर्दलीय होकर क्षेत्र में घूमते हुए दिखाई दे रहे हैं। किसी भले आदमी ने समझाया ज़रूरी है कि हर चुनाव लड़ा ही जाए पर मंत्री जी कहाँ मानने वाले विधायक नहीं बनेंगे तो क्या हुआ कम से कम वोटकटवा बनके राजनीति की दुकान तो चलती रहेगी पर अब मंत्री जी को कौन समझाए कि अगर यही हाल रहा तो अभी तो ख़ाली राजनीतिक दलों के दरवाज़े बंद हुए हैं इस बार क्षेत्र की जनता के दरवाज़े भी उनके लिए बंद हो जाएंगे..