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गन्ना खरीद की मनमानी से किसानों पर पड रही दोहरी मार, दर दर भटक रहे किसान

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दबंग दलालों और बाबुओं की मनमानी

आमिर हसन सिद्दीकी

बलरामपुर।।दलालों के हाथ अपने खून पसीने की कमाई से पैदा किये कृषि उत्पादों को औने पौने-दाम पर बेंचने को किसान किस कदर बेबस हैं इसकी जमीनी हकीकत ए.सी., ब्लोवर में समय काटने वाले जिम्मेदार अधिकारी और नेता जी लोग शायद बिल्कुल भी नही जानते या जानकर अंजाने से हैं ।वर्ना किसान आज अपने उत्पादों का वाजिब दाम पाने के लिये ईस कदर बदहाल न होते।किसानों के विकास उनके हितैसी होने के हजारों दावे तो कइयों करते देखे जा सकते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर क्या दुर्दशा है इसे तो गांवों में जॉकर ही जाना जा सकता है।अब किसानों की दुर्दशा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि किसान न तो अपनी फसलों का वाजिब दाम पा रहे हैं न ही खेती में लगाने को भर्ती जुटा सके हैं।जिससे रवि फसल की बुवाई हो सके ऐसे में किसान छेत्रीय साहूकारों, सूदखोरों से मोटी ब्याज पर कर्ज लेने को न केवल मजबूर हैं बल्कि कुछ तो अपनी कृषि की जमीन को गिरवीं तक रख रहे है ।कितनी विडम्बना है सरकार द्वारा मनमोहक दर पर धान की खरीद के लुभावन एलान के बाद किसानों के अनाज क्रय केंद्रों तक नही पंहुच सके ।जबकि कागजो में खरीद बराबर चलती रही।किसान मजबूरन आने पौने दामो पर अपनी उत्पाद बेंचते रहे।उधर अपने धान को न बेंच पाए किसान जहां किसानी में घाटे से उबरने की बाट जोह कर नगदी फसल गन्ने से आर्थिक क्षतिपूर्ति की आस पाले दिन काट रहे थे ।वहीं यहां भी किसानों को गन्ने की खरीद न होने से भी गम्भीर झटका लगा जिससे किसान भारी कर्जदारी के खांई में जाते दिखाई दे रहे हैं। न तो किसानों की धान की फसल को क्रय केंद्रों पर सरकारी व उचित दर पर लिया गया न ही गन्ने से प्रतिपूर्ति का मौका मिल पा रहा है यही नही गेंहू बोवाई के समय पेंडी गन्ना न बिकने के कारण किसान अब गेंहूँ की बोवाई भी नही कर सकेंगे । जिससे आगामी फसल में भी भारी घाटे के पूरे आसार हैं। किसानों की आर्थिक रीढ़ कहे जानेवाले गन्ने की फसल से तो इस बार ऐसा झटका लग रहा है मानो इनके पैर के नीचे से जमीन ही खींच गयी है। चीनी मिलों के इशारे पर गन्ना विभाग इस कदर नाचता दिखाई पड़ रहा है मानो इनको वेतन यही चीनी मिलें देती हों। गन्ने को रिजेक्टेड, सामान्य और अर्ली तीन कैटेगरी में बांट कर पहले अर्ली केटेगरी की ही पर्ची जारी करना शुरू किया ,जबकि किसान रिजेक्टेड को काट कर गेंहू बोवाई की ताक में बैठे थे ।लेकिन उनकी समस्या दूर करने को कौन कहे किसी भी तरह की पर्ची न जारी होने से स्थिति और बिगड़ती ही दिखाई पड़ी ।गन्ना कार्यालय में कुछ दबंग दलालों और बाबुओं की मनमानी इस कदर हावी है कि 70-80 बीघा के काश्तकारों का रकबा शून्य फीड है जबकि 1 से डेढ़ बीघे वालों का 70 -80 बीघा । जिससे पर्ची दलाली चरम पर पंहुच गया है ।असली किसान अपने रकबा को फीड कराने के लिए दर-दर की ठोकरे खा रहे हैं जबकि दलाल पर्चियां बेंच रहे हैं मज़बूर किसानो का गन्ना क्रय केंद्रों पर 150 -160 रुपए में खरीद कर मोटी रकम कमा रहे हैं।इससे किसानों में न केवल भारी रोष व्याप्त है बल्कि किसान खुले आम दलालों साहूकारों के हाथों बिक रहे हैं ।अब इसका खामियाजा किसे भोगना पड़ सकता है ये एक खुली किताब

किसानों का बयान
ईटई मैदा निवासी गन्ना किसान राम कुमार ने बताया कि प्रभावशाली और दबंग लोगों को मिल गेट पर ही खरीद की पर्ची थोक मात्रा में उपलब्ध हो जा रही है। जिससे से प्रभावशाली और दबंग लोग किसानों का गन्ना औनेपौने दाम पर खरीद कर मिल को सप्लाई कर दे दहे है। राजू ने बताया कि क्षेत्र में स्थित हर क्रय केंद्रों पर दुव्र्यवस्था है, जिसके चलते गन्ना किसान परेशान है और बिचौलिये मलाई काट रहे है।

विपक्षी नेताओं का बयान
आयाज़ मुस्तफ़ा खां जिला अध्यक्ष (प्रसपा)ने सरकार पर आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार किसानों के साथ शत्रुतापूर्ण व्यवहार कर रही है। किसान तमाम परेशानियों से गुजर रहा है, उसके ऊपर कर्ज हैं।बीज, कीटनाशक की सुचारू व्यवस्था न होने से और अपनी फसल का लागत मूल्य भी न मिल पाने से किसान बदहाली की जिंदगी जी रहा है।वह क्षुब्ध होकर आत्महत्या कर रहा है।जहां एक ओर खेती-किसानी के कार्यों में सरकार कोई मदद नहीं कर रही है।वहीं कृषि उत्पादकों के संरक्षण और संवर्धन में भी प्रदेश सरकार के पास कोई नीति नहीं है।वस्तुतः सरकार की नीतियां कारपोरेट जगत के लिए बनी हैं, किसान के लिए नहीं।
मोईन सिद्दीक़ी जिला महासचिव(प्रसपा)ने कहा कि कर्ज किसान को नहीं, व्यापारी को दिया जाता है। किसानों को तो बस अपमानित किया जाता है। मौजूदा सरकार सुनने को भी तैयार नहीं है।