Home Big grid सुभाष की धमाकेदार एन्ट्री ने उड़ाई कई संभावित प्रत्याशियों की नींद

सुभाष की धमाकेदार एन्ट्री ने उड़ाई कई संभावित प्रत्याशियों की नींद

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नवीन कुमार पाण्डेय
चतराआगामी लोकसभा चुनाव की सुगबुगाहट होते ही चतरा संसदीय सीट से भाग्य आजमाने के लिए अभी से ही कई दिग्गजों ने अपनी कमर कस ली है। जबकि कुछ संभावित प्रत्याशी पानी की गहराई मापने के बाद ही इस महाकुंभ में छलांग लगाने की सोच रहे हैं। वैसे तो इस क्षेत्र की भोली-भाली जनता सदियों पूर्व से ही ठगी का शिकार होती आयी हैं और हमेशा से ये बैसाखी के सहारे ही अपना सफर तय की है क्योंकि झारखंड विभाजन से पूर्व कभी बिहारी बाबू का यहां वर्चस्व रहा है तो कभी जातीय समीकरण हावी रहा ,तो कभी मोदी लहर। शायद यही कारण रहा है कि चतरा लोकसभा सीट पर भाजपा के सुनील कुमार सिंह का वर्तमान समय में कब्जा है ,जो पिछले बार के चुनाव से ऐन वक्त के पहले चतरा आए थे परंतु पूरे देश में चल रहे नरेंद्र मोदी की लहर ने इन्हें चतरा में सांसद का ताज प्रदान कर दिया था। परंतु इस बार 2019 में होने वाला चुनाव पहले के चुनाव से कुछ भिन्न दिख रहा है।खासकर चतरा में रेल लाने का सपना दिखाने वाले वर्तमान सांसद सुनील कुमार सिंह के लिए यह मुद्दा गले का फांस बनकर रह गया है और वे इस मामले में चारों ओर से घिर चुके है।वैसे तो इस सीट पर कई दिग्गज अपना भाग्य आजमाने के फिराक में लगे हैं। जिसमें चतरा के पूर्व सांसद इंदर सिंह नामधारी, धीरेंद्र अग्रवाल ,नागमणि ,जेबीएम नेत्री नीलम देवी, अरुण कुमार सिंह, किसलय तिवारी तथा राजेंद्र साहू जैसे दर्जनों नाम है, जो यहां का सांसद बनने का सपना संजोए बैठे है ।परंतु इन सबों से अलग राजद के सुभाष यादव की धमाकेदार इंट्री ने चतरा की राजनीति में एक विशाल भूचाल ला दिया है। बिहार राज्य के चर्चित व्यवसाई तथा राजद सुप्रीमो के खास कहे जाने वाले सुभाष यादव की दावेदारी पेश करने के बाद से सबसे अधिक भाजपा खेमा परेशान दिख रहा है।पिछले दिनों दिल्ली में हुए टिकट बंटवारे के समझौते में कांग्रेस तथा राजद के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया था, जिसमें कांग्रेस ने अपना हाथ पीछे खींचते हुए सुभाष को हरी झंडी दिखा दिया है ।कयास लगाया जा रहा है कि यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो सुभाष यादव महागठबंधन से प्रत्याशी होंगे। वैसे तो पिछले छः माह पूर्व से ही श्री यादव के कार्यकर्ता चतरा में सक्रिय दिख रहे थे तथा अपने निजी खर्चे से
कई सड़कों का मरम्मती, फुटबॉल टूर्नामेंट के साथ- साथ कई जनउपयोगी योजनाओं को मूर्त रूप देने में लगे थे। पिछले माह सुभाष यादव के गृह प्रवेश के मौके पर तीन सौ की बड़ी संख्या में जिस प्रकार से बिहारी नेताओं के काफिला के साथ सुभाष यादव ने पहली बार चतरा में कदम रखा था,उससे यहां की ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई थी। इस काफिला में बिहार राज्य के 14 विधायक भी शामिल थे।चतरा सीट से चुनाव लड़ने के सवाल पर सुभाष यादव का कहना है कि चतरा के लोगों ने जिस प्रकार से राजद के साथ प्रेम दिखाया है ,उसका फायदा यहां के लोगों को अब तक नहीं मिला है और इनके साथ अब तक सौतेला जैसा व्यवहार ही हुआ है। इसलिए राजद सुप्रीमो ने लोगों के आंसू पोछने तथा उनके जख्मों पर मरहम लगाने के लिए ही उन्हें यहां भेजा है ।उन्होंने आगे कहा कि 26 करोड़ की लागत से यहां के सभी पंचायतों तथा गांव-गांव में पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराना इनकी पहली प्राथमिकता है और इसे वे चुनाव से पूर्व ही कर दिखाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि चतरा में माइंस तथा मिनिरल का प्रचुर भंडार होने के बावजूद यहां के लोग बदहाली में अपना जीवन गुजार रहे हैं। जबकि केंद्र तथा राज्य की भाजपा नेता दिल्ली में अपने निजी विकास में यहाँ का पैसा खर्च कर रहे है।वे ऐसा होने नहीं देंगे तथा चतरा संसदीय क्षेत्र को देश के मानचित्र पर एक समृद्ध स्थान दिलाने का भी कार्य करेंगे ।
बहरहाल इतना तो तय है कि चतरा संसदीय सीट पर राजद से सुभाष का लड़ना लगभग तय माना जा रहा है और इनकी धमाकेदार इंट्री ने दूसरे दल के प्रत्याशियों की रात की नींद उड़ाकर रख दिया है। सुभाष के यहां से चुनाव लड़ने के फैसले के बाद चतरा के वर्तमान सांसद सुनील कुमार सिंह को परेशान होना तो लाजमी ही है क्योंकि चतरा के लोगों के साथ कभी समय नहीं देने वाले तथा चंद चाटुकारों से घिरे रहने का खामियाजा इस बार इन्हें भुगतना ही पड़ेगा तथा अपने कार्यकाल में किये गए विकास कार्य का पूरा विवरण यहां की जनता को देना होगा। वहीं दूसरी ओर सुभाष यादव ने चतरा के लोगों के मन को भाँपकर अभी से ही अपना जमीन तैयार करना शुरू कर दिये है। इस बार के दशहरा पूजा के अवसर पर श्री यादव ने जिले के सभी पूजा पंडालों पर स्वयं उपस्थित होकर सभी पंडालों को बिना बोले ही एक बड़ी धनराशि सहयोग के रूप में दिया था तो वहीं भद्रकाली मंदिर में तीन लाख रुपये अपने निजी खर्चे से मंदिर के विकास कार्य पर में खर्च करने का घोषणा किया है। इस प्रकार यहां के सभी धर्म संप्रदायों एवं जाति के साथ बिना भेदभाव किये दोनों हाथों से आर्थिक सहयोग करने में लगे हैं।शायद यही कारण है कि अब यहाँ की जनता इन्हें अपना तारणहार के रूप में देखने लगी है।हालांकि सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि महागठबंधन में शामिल झारखंड विकास मोर्चा के एक प्रबल प्रतियाशी नीलम देवी पिछले बार के लोकसभा चुनाव में यहाँ से अपना भाग्य आजमायी थी परंतु अपनी पराजय के बाद भी वह यहां के लोगों के हर सुख-दुख में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती रही। इस प्रकार नीलम देवी का भी क्षेत्र की जनता पर एक विशेष पकड़ है।महागठबंधन के सवाल पर पार्टी सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी का रूख आखिर क्या होता है ?क़यास लगाये जा रहे कि मोदी रथ को रोकने के लिए महागठबंधन में रहते जेवीएम भी चतरा सीट पर अपनी दावेदारी पेश न करे।वर्तमान सांसद के प्रति लोगों के रूखे व्यवहार पर भाजपा खेमे में भी मंथन चल रहा है। यदि वर्तमान सांसद सुनील सिंह ही भाजपा का उम्मीदवार रहे तो सुभाष यादव के लिए जीत का डगर कुछ ज्यादा ही आसान होगा जबकि लोगों की मंशा को भांपते हुए यदि भाजपा किसी दमदार प्रत्याशी को मैदान में यहां उतारेगी तो नजारा बदल भी सकता है। कुल मिलाकर सुभाष के मैदान में आने से चतरा में चुनावी सरगर्मी कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है जिससे ठंड के इस मौसम में भी गर्मी का एहसास होने लगा है।