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शहाबुद्दीन के शूटर की हत्या

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आलम को गोलियों से भूना

राजेश कुमार

तबरेज़ की फ़ाइल फोटो

पटना:पटना में दिनदहाड़े शहाबुद्दीन के शॉर्प शूटर (38वर्ष) तबरेज आलम को गोलियों से भून दिया गया। शुक्रवार दोपहर 3 बजे घटना तब हुई जब तबरेज आलम नमाज अदा कर वापस अपनी गाड़ी में बैठने जा रहा था। जैसे ही वह कोतवाली थाने की बाउंड्री से सटी सड़क पर पहुंचा और गाड़ी का गेट खोलने को आगे बढ़ा, बाइक सवार अपराधियों ने दनादन गोलियां बरसा दीं। एक बाइक पर दो की संख्या में आये नकाबपोश शूटरों ने उस पर छह राउंड गोलियां बरसायीं। गोली लगते ही तबरेज गिर गया। घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे कोतवाली थानेदार रामशंकर सिंह तबरेज को अपनी गाड़ी में लादकर पीएमसीएच ले गये जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बाद में एसएसपी मनु महाराज भी घटनास्थल पर पहुंचे और जांच की।
रेकी कर रहे थे अपराधी :

अपराधी तबरेज की काफी देर से रेकी कर रहे थे। कोतवाली थाने से जैसे ही वह नमाज पढ़कर वह बाहर निकला, अपराधियों को उसकी खबर मिल गयी। कुछ संदिग्ध थाने से पहले चाय दुकान मोड़ पर भी खड़े थे। वहां भीड़ थी, लिहाजा शूटरों ने उसके आगे बढ़ने का इंतजार किया। जैसे ही वह गाड़ी का गेट खोलने आगे बढ़ा अपराधियों ने उस पर गोलियां दाग दीं। पास खड़े कुछ लोगों ने अपराधियों को खदेड़ने की कोशिश भी की लेकिन वे हथियार लहराते हुये भाग निकले।
हेलमेट और मास्क पहने थे शूटर :
बाइक चलाने वाले अपराधियों ने हेलमेट पहन रखी थी जबकि पीछे बैठे शूटर ने काले रंग की टोपी पहनी थी। शूटर की कद-काठी पांच फुट से ऊपर की थी। घटनास्थल से दो बांस की दूरी पर स्थित चाय दुकान के पास ही एक संदिग्ध लाइनर भी खड़ा था। उसने हेलमेट के ऊपर से मास्क पहन रखा था।
चार पर दर्ज हुई नामजद एफआईआर : 
तबरेज की हत्या के बाबत चार पर एफआईआर दर्ज की गयी है। नामजद आरोपियों में रुमी मल्लिक (अरवल), डब्लू मुखिया (सब्जीबाग), अंजर खान (कुल्हड़िया कॉम्पलेक्स, पटना)और फारुख आलम (जहानाबाद) शामिल हैं। मृतक की पत्नी के बयान पर नामजद एफआईआर दर्ज की गयी है।

तबरेज पर दर्ज थे कई मामले :

तबरेज मूल रूप से जहानाबाद जिले के शेख आलम चौक, वार्ड नंबर 13 का रहनेवाला था। पटना में वह फ्रेजर रोड स्थित ग्रैंड चंद्रा अपार्टमेंट में रहता था। उस पर पटना, सीवान और धनबाद में हत्या, रंगदारी, जान से मारने की कोशिश, आर्म्स एक्ट सहित कई केस दर्ज थे।
सीवान में करीब डेढ़ दशक पहले हुये एक एनकाउंटर में तबरेज बाल-बाल बचा था। पटना के आमलगंज का रहनेवाला उसका एक साथी सुल्तान मियां उस एनकाउंटर में मारा गया था। उस वक्त तबरेज शहाबुद्दीन के लिये दूसरे जिलों में जाकर भी आपराधिक वारदातों को अंजाम देता था।